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'धुरंधर' के आलम भाई का स्ट्रगल, जेब में 84 रुपया, मंदिर नहीं बैंक के दरवाजे पर टेकते थे माथा, बुरा था गौरव गेरा का हाल

 Written By: Priya Shukla
 Published : Jun 02, 2026 03:09 pm IST,  Updated : Jun 02, 2026 03:09 pm IST

गौरव गेरा पिछले दिनों 'धुरंधर' में अपने किरदार को लेकर काफी चर्चा में रहे। उन्होंने इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में 'आलम भाई' की भूमिका निभाई थी। आज गौरव गेरा के सितारे बुलंदियों पर हैं, लेकिन एक समय था जब उनकी जेब में 100 रुपये भी नहीं थे।

gaurav gera- India TV Hindi
गौरव गेरा। Image Source : INSTAGRAM/@GAURAVGERA

एक्टर गौरव गेरा इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। आदित्य धर की 'धुरंधर' और 'धुरंधर 2' की सफलता के बाद उन्हें दर्शकों और फैंस से खूब प्यार मिल रहा है। इस ब्लॉकबस्टर स्पाई-थ्रिलर में गौरव गेरा ने 'आलम भाई' नाम के जासूस की भूमिका निभाई है, जो ल्यारी में पैर जमाने में हमजा (रणवीर सिंह) की मदद करता है। अपने किरदार के लिए गौरव गेरा को दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है। लेकिन, उनके लिए यहां तक पहुंचने का सफर काफी कठिनाइयों भरा रहा है। हाल ही में गौरव गेरा ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि कैसे एक समय पर उनकी जेब में 100 रुपये भी नहीं थे।

गौरव गेरा के परिवार का फिल्मों से नहीं था नाता

जिस्ट के साथ बातचीत में गौरव गेरा ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया और बताया कि उनका परिवार का दूर-दूर तक फिल्मी दुनिया से कोई नाता नहीं था। वह अपने परिवार के पहले थे, जिन्होंने फिल्मी दुनिया का रुख किया। गौरव बताते हैं कि स्कूल के दिनों से ही उनकी आर्ट में रुचि होने लगी थी। स्कूल फंक्शन्स में वह फैंसी ड्रेस कॉम्पटिशन में भाग लेना शुरू किया। लेकिन, स्कूल में पढ़ाई को प्रयॉरिटी दी जाती थी। उन्होंने उन दिनों को याद करते हुए कहा- 'आर्ट में मुझे ए-प्लस मिलते थे, लेकिन पढ़ाई में 79, 80 और 82 परसेंट आते थे। मुझे लगता था कि मैं जिस चीज में अच्छा हूं, वही कर रहा हूं।'

फैशन डिजाइनिंग से शुरू किया करियर

गौरव गेरा ने कहा- 'मैं स्केचिंग में अच्छा था। कॉलेज में भी मैंने आर्ट में ही अप्लाई किया था, लेकिन नहीं हुआ। फिर मैं फैशन में चला गाय और मुझे लगा कि मैं यही करना चाहता हूं। पापा से मैंने कहा, पैसे बचा लीजिए, बड़ा महंगा कोर्स है। मैं नहीं करूंगा। पापा ने कहा- आधा साल काम कर ले, फिर मन में जो आए वो करना। मैंने ठीक आदा साल काम किया और फिर थिएटर जॉइन कर लिया।'

गौरव गेरा के पास थे 84 रुपये

मुंबई में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए गौरव गेरा बताते हैं- 'एक समय ऐसा था, जब मेरे खाते में मात्र 84 रुपये थे। मैं जब भी बैंक के सामने से गुजरता, बैंक देखकर कहता था- मेरा ख्याल रखना। आते-जाते बैंक में माथा भी टेक लेता था। पापा ने कभी साथ नहीं छोड़ा, लेकिन उनकी सैलेरी कम थी। उनकी चिट्ठियां आज भी मेरे पास हैं, जिसमें लिखा होता था- 2000 भेज रहा हूं, इससे ज्यादा नहीं हैं। मैं थोड़ा खुद्दार टाइप का था। मैं देने वाला बनना चाहता था, न कि लेने वाला।'

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